चरणदास महंत के बयान से गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत; “रामभद्राचार्य भाजपा के प्रचारक, नहीं मानता ‘जगतगुरु’, बोले- धीरेंद्र शास्त्री समेत कई बाबा फर्जी
मनेन्द्रगढ़, 25 मई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सोमवार को मनेन्द्रगढ़ दौरे के दौरान दिए गए बयान से प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कथावाचक रामभद्राचार्य और धीरेंद्र शास्त्री को लेकर कड़े शब्दों में टिप्पणी की।
महंत ने साफ कहा कि वे रामभद्राचार्य को “जगतगुरु” नहीं मानते और चिरमिरी में चल रही उनकी कथा सुनने भी नहीं जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है।

दरअसल, इन दिनों चिरमिरी में रामभद्राचार्य की कथा आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी दौरान पत्रकारों ने महंत से इस आयोजन में शामिल होने को लेकर सवाल किया, जिस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका वहां जाने का कोई इरादा नहीं है।
महंत ने कहा, “मैं रामभद्राचार्य को जगतगुरु नहीं मानता। जिस तरह से वे भाजपा का प्रचार कर रहे हैं, उससे साफ है कि वे सिर्फ भाजपा के प्रचारक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कथावाचक और बाबा धार्मिक मंचों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, “ऐसे बाबा लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। कांग्रेस के किसी भी कार्यकर्ता या नेता को ऐसी जगह नहीं जाना चाहिए।”
अपने बयान में महंत ने यह भी कहा कि कांग्रेस की विचारधारा अलग है और उनकी आस्था किसी एक व्यक्ति या मंच तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम तो कण-कण में भगवान मानने वाले लोग हैं। हमारे लिए हर जगह भगवान हैं। धर्म को राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं है।”

इस दौरान उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री का नाम लेते हुए भी तीखी टिप्पणी की और उन्हें फर्जी बताया। उनके इस बयान के बाद भाजपा और धार्मिक संगठनों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महंत का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में धार्मिक आयोजनों के जरिए राजनीतिक मौजूदगी और जनसंपर्क को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। भाजपा जहां धार्मिक मंचों के माध्यम से जनसंपर्क मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस इसे धर्म की राजनीति बताकर घेरती रही है।
महंत के बयान ने अब छत्तीसगढ़ की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है।










